BREAKING NEWS
देश नजर पर पढ़ें ताज़ा और महत्वपूर्ण खबरें...

GRT Jewellers का TBZ अधिग्रहण, ₹1,034 करोड़ की डील से ज्वेलरी बाजार में हलचल

 

GRT Jewellers का TBZ अधिग्रहण, ₹1,034 करोड़ की डील से ज्वेलरी बाजार में हलचल

भारतीय ज्वेलरी कारोबार में एक बड़ी डील सामने आई है। चेन्नई स्थित GRT Jewellers India ने मुंबई की प्रमुख ज्वेलरी कंपनी Tribhovandas Bhimji Zaveri Limited (TBZ) में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने का समझौता किया है। इस प्रस्तावित अधिग्रहण से ज्वेलरी सेक्टर में दोनों कंपनियों की मौजूदगी और कारोबार के विस्तार को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

74.12% हिस्सेदारी खरीदेगी GRT

समझौते के तहत GRT Jewellers, TBZ में करीब 74.12 प्रतिशत वोटिंग हिस्सेदारी हासिल करेगी। इसके लिए लगभग 4.95 करोड़ शेयर खरीदे जाने हैं। प्रति शेयर अधिकतम कीमत ₹209 तय की गई है और इस हिस्सेदारी की कुल कीमत करीब ₹1,033.71 करोड़ बैठती है।

हालांकि, यह प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। अधिग्रहण को अंतिम रूप देने के लिए संबंधित नियामकीय मंजूरियों और समझौते में तय शर्तों को पूरा करना होगा।

पब्लिक शेयरधारकों के लिए भी ओपन ऑफर

नियंत्रण हिस्सेदारी खरीदने के बाद GRT Jewellers ने TBZ के सार्वजनिक शेयरधारकों के लिए भी ओपन ऑफर की प्रक्रिया शुरू की है। इसके तहत करीब 25.88 प्रतिशत वोटिंग शेयर पूंजी के बराबर 1,72,70,845 शेयर खरीदने का प्रस्ताव है।

ओपन ऑफर की कीमत ₹249.61 प्रति शेयर रखी गई है। यदि सभी पात्र शेयर स्वीकार किए जाते हैं तो इस हिस्से पर अधिकतम करीब ₹431 करोड़ खर्च हो सकते हैं। इस तरह प्रमोटर हिस्सेदारी और ओपन ऑफर को मिलाकर संभावित वित्तीय आकार करीब ₹1,465 करोड़ तक पहुंच सकता है।

GRT के लिए क्यों अहम है यह डील?

TBZ भारतीय ज्वेलरी बाजार का पुराना नाम है और कंपनी का इतिहास 1864 तक जाता है। उसके पास देश के अलग-अलग हिस्सों में स्टोर और स्थापित ग्राहक आधार है। दूसरी तरफ GRT Jewellers की मजबूत मौजूदगी दक्षिण भारत में रही है।

ऐसे में TBZ का अधिग्रहण GRT को अपने कारोबार का भौगोलिक विस्तार करने और नए ग्राहक बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद कर सकता है। दोनों कंपनियों के रिटेल नेटवर्क के मेल से भविष्य में कारोबार के स्तर पर भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

फिलहाल डील को अंतिम मंजूरी मिलने और बाकी शर्तें पूरी होने का इंतजार है। आगे नियामकीय मंजूरियां, ओपन ऑफर की प्रक्रिया और अधिग्रहण के बाद बनने वाला नया प्रबंधन ढांचा इस सौदे की अगली दिशा तय करेगा।

0 टिप्पणियाँ

Close Menu