नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा ऐलान किया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्हें 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया। पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर इस अवधि में इस्तीफा नहीं दिया गया तो देशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा।
CJP ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर राजनीतिक बहस तेज है। पार्टी ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं और इससे लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ रहा है।
अभिजीत दीपके ने दावा किया कि SIR के जरिए 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। हालांकि, यह राजनीतिक दावा है और नाम हटाए जाने के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इसलिए मतदाता सूची से नाम हटने के आंकड़े को सीधे इतने लोगों के मतदान का अधिकार खत्म होने के रूप में नहीं देखा जा सकता।
CJP ने रखीं कई मांगें
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी ने केवल CEC के इस्तीफे की मांग नहीं की, बल्कि कई अन्य मांगें भी सामने रखीं। CJP ने आगामी चुनावों को रोकने, जनवरी 2025 की मतदाता सूची को वापस लाने और SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है।
पार्टी का कहना है कि SIR की पूरी प्रक्रिया की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जानी चाहिए। इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को हटाकर नया कानून बनाने की मांग भी की गई है।
SIR को लेकर विपक्ष के सवाल
SIR मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसके तहत मतदाता सूची में शामिल नामों और संबंधित रिकॉर्ड की दोबारा जांच की जाती है। इसी प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग राज्यों में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी चुनाव आयोग और SIR को लेकर गंभीर आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली से मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल पैदा हो रहे हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने आयोग के भीतर SIR को लेकर बड़े मतभेद होने के दावों को खारिज किया है। ऐसे में इस मामले में राजनीतिक आरोपों के साथ-साथ आयोग का पक्ष भी सामने आया है।
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट से भी बढ़ी चर्चा
CJP का यह ऐलान उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की बात कही गई थी।
रिपोर्ट में SIR समेत चुनाव से जुड़े कई फैसलों पर उनकी असहमति का उल्लेख किया गया। हालांकि, आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि आयोग के फैसले सभी चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा मामला
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी मामला चल रहा है। इसमें नियुक्ति की प्रक्रिया और चयन समिति की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
अब CJP के 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद इस मामले पर आगे क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर रहेगी। साथ ही SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और नियुक्ति कानून से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के मामले में आने वाले फैसले भी महत्वपूर्ण होंगे।

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