आजमगढ़ के अहरौला क्षेत्र के शंभूपुर गांव में हुई तीन हत्याओं ने पूरे इलाके को हिला दिया। घर में पूजा चल रही थी और इसी दौरान अरविंद सिंह का विवाद हो गया। आरोप है कि उसने अपनी पत्नी बबीता सिंह और पूजा करा रहे दो पुरोहितों पर गोली चला दी। तीनों की मौत के बाद अरविंद अपने बच्चों को लेकर घर के एक कमरे में बंद हो गया। कई घंटे चले पुलिस ऑपरेशन के बाद अरविंद की भी मौत हो गई। इस दौरान उसके एक बेटे की भी जान चली गई।
घटना से पहले घर में धार्मिक अनुष्ठान कराया जा रहा था। बताया गया कि यह पूजा अरविंद की परेशानी दूर करने और परिवार में शांति के लिए रखी गई थी। लेकिन अरविंद इस पूजा को लेकर नाराज था। एक दिन पहले भी घर में इसे लेकर विवाद हुआ था और पुलिस को सूचना दी गई थी। हालांकि उस समय मामला शांत हो गया था।
अगले दिन अरविंद घर पहुंचा तो पूजा करा रहे लोगों से उसकी कहासुनी हो गई। बताया जाता है कि उसने वहां मौजूद पुरोहितों से पहचान पत्र मांगा। पत्नी बबीता ने बीच में आकर विरोध किया, जिसके बाद विवाद बढ़ गया और गोली चल गई। इस घटना में बबीता और दो पुरोहितों की मौत हो गई।
2018 में भाई की हत्या के बाद बदल गया था अरविंद
अरविंद के व्यवहार में बदलाव की बात वर्ष 2018 की एक घटना से जोड़कर देखी जा रही है। उसके बड़े भाई सुनील सिंह उर्फ गुड्डू की अक्टूबर 2018 में हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि पूजा के बाद आयोजित भंडारे के दौरान सुनील को गोली मारी गई थी।
भाई की हत्या के बाद अरविंद काफी परेशान रहने लगा था। परिवार और आसपास के लोगों के मुताबिक, वह लोगों से कम मिलने-जुलने लगा और पहले की तरह सामान्य जीवन नहीं जी रहा था। उसके नशा करने की बात भी सामने आई है। हालांकि उसके मानसिक रूप से बीमार होने की कोई चिकित्सकीय पुष्टि सामने नहीं आई है।
इसी दौरान परिवार में यह धारणा भी बनी कि अरविंद पर किसी तरह का 'साया' है। इसी सोच के चलते पूजा-पाठ कराने की बात कही गई थी। हालांकि 'साए' वाली इस बात की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसे परिवार की मान्यता के रूप में ही देखा जा रहा है।
हथियार अरविंद के पास कैसे आए?
घटना के बाद उसके पास मौजूद हथियारों को लेकर भी सवाल उठे। सामने आई जानकारी के अनुसार, हथियार पहले उसके भाई सुनील सिंह के नाम पर थे। सुनील की हत्या के बाद लाइसेंस अरविंद के नाम ट्रांसफर होने की बात सामने आई है।
घटना के समय अरविंद के पास हथियार और बड़ी संख्या में कारतूस होने की जानकारी सामने आई। हालांकि कारतूसों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है।
तीन लोगों की हत्या के बाद अरविंद बच्चों के साथ कमरे में बंद हो गया था। पुलिस ने काफी देर तक उसे समझाने की कोशिश की। बाद में हुई कार्रवाई में अरविंद घायल हुआ और अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इसी दौरान उसके एक बेटे को भी गोली लगी, जिसकी बाद में मौत हो गई। बाकी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
अब पुलिस इस पूरे मामले की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ रही है। 2018 में सुनील सिंह की हत्या, परिवार के पुराने विवाद, पूजा को लेकर तनाव, हथियारों की उपलब्धता और घटना वाले दिन हुई कहासुनी—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। इनकी पूरी तस्वीर जांच आगे बढ़ने के बाद ही साफ होगी।

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