इस पहल का नाम PRAMAAN (Police Road Accident Monitoring, Assurance and Analytics Network) रखा गया है। इसके लिए पांच सदस्यों की एक विशेष टीम बनाई गई है। यह टीम शहर में होने वाले सड़क हादसों से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन करेगी और दुर्घटनाओं के पैटर्न को समझने की कोशिश करेगी।
पुलिस के अनुसार, हादसों से जुड़े आंकड़ों के आधार पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिन्हित किया जाएगा। इसके बाद संबंधित स्थानों पर सड़क सुरक्षा से जुड़े जरूरी कदम उठाने की दिशा में काम किया जा सकेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य हादसे होने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से संभावित जोखिम वाले स्थानों पर ध्यान देना है।
PRAMAAN को Zero Fatality District (ZFD) कार्यक्रम के तहत सड़क सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। डेटा के इस्तेमाल से पुलिस को यह समझने में मदद मिलेगी कि किन सड़कों या क्षेत्रों में दुर्घटनाएं अधिक हो रही हैं और वहां किस तरह के सुधार या निगरानी की जरूरत है।
लखनऊ जैसे बड़े शहर में बढ़ते यातायात के बीच सड़क सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में दुर्घटनाओं के आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल करने की यह व्यवस्था आने वाले समय में पुलिस की सड़क सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बन सकती है।
पुलिस की यह पहल कितनी प्रभावी साबित होती है, यह आगे लागू किए जाने वाले सुरक्षा उपायों और उनके परिणामों पर निर्भर करेगा। फिलहाल PRAMAAN के जरिए हादसों के आंकड़ों को कार्रवाई से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।

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