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अमेठी में फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों का बैंक लोन घोटाला, 12 लोगों पर FIR

 

अमेठी में फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों का बैंक लोन घोटाला, 12 लोगों पर FIR

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से एक्सप्रेस क्रेडिट लोन लेने के नाम पर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोगों ने राजीव गांधी पॉलिटेक्निक मुसाफिरखाना और ग्रामोद्योग सेवा संस्थान के कर्मचारी बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उनके आधार पर बैंक से करोड़ों रुपये का लोन स्वीकृत कराया।

बैंक की आंतरिक जांच के अनुसार, इस पूरे मामले में करीब 6 करोड़ 40 लाख रुपये की कथित वित्तीय धोखाधड़ी सामने आई है। मामले में अमेठी की मुसाफिरखाना कोतवाली पुलिस ने 12 नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

64 एक्सप्रेस क्रेडिट लोन का मामला

बैंक की शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2022 से 2024 के बीच अलग-अलग जिलों की SBI शाखाओं से एक्सप्रेस क्रेडिट लोन के लिए आवेदन किए गए। इन आवेदकों को राजीव गांधी पॉलिटेक्निक और ग्रामोद्योग सेवा संस्थान का कर्मचारी बताया गया।

आरोप है कि कथित फर्जी नियुक्ति पत्र, वेतन पर्ची और फॉर्म 16 तैयार कर बैंक के सामने प्रस्तुत किए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर वेतनभोगी कर्मचारियों की प्रोफाइल तैयार हुई और लोन की प्रक्रिया पूरी की गई।

बैंक के अनुसार, इस तरह कुल 64 लोन स्वीकृत किए जाने की बात सामने आई है। इनमें से 11 लोन अमेठी जिले की SBI शाखाओं से जारी होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, मामले की जांच पूरी होने के बाद ही लोन खातों और वित्तीय नुकसान की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

खातों में रकम डालकर सैलरी अकाउंट दिखाने का आरोप

मामले की जांच में बैंक खातों से जुड़ी गतिविधियां भी सामने आई हैं। शिकायत के अनुसार, कथित कर्मचारियों के नाम पर बैंक खाते खोले गए और कुछ खातों में पहले डमी क्रेडिट के जरिए रकम जमा की गई।

आरोप है कि इन खातों को नियमित वेतन खाते के रूप में दिखाने के बाद संबंधित लोगों की सैलरी स्लिप और अन्य दस्तावेज बैंक में जमा कराए गए। बैंक की तहरीर में कुछ रकम राजीव गांधी पॉलिटेक्निक के HDFC बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के खातों से भेजे जाने का भी उल्लेख है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि खातों में जमा रकम का उद्देश्य क्या था और लोन मिलने के बाद पैसे कहां-कहां ट्रांसफर किए गए।

लोन खाते NPA होने के बाद शुरू हुई जांच

बैंक के मुताबिक, कुछ खातों में शुरुआत में एक-दो किस्तें जमा की गईं, लेकिन बाद में कई लोन खाते एनपीए हो गए। इसके बाद बैंक ने आंतरिक जांच शुरू की।

जांच के दौरान कथित तौर पर नियुक्ति पत्र, वेतन पर्चियों और फॉर्म 16 से संबंधित कई सवाल सामने आए। बैंक को संदेह हुआ कि कुछ आवेदक वास्तव में संबंधित संस्थानों के कर्मचारी थे भी या नहीं।

इसके बाद बैंक ने पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी और दस्तावेजों के आधार पर मुकदमा दर्ज कराया।

पुलिस के सामने कई अहम सवाल

SBI के मुख्य शाखा प्रबंधक राहुल सिंह की तहरीर पर मुसाफिरखाना कोतवाली में 12 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब आरोपियों की भूमिका और दस्तावेजों की सत्यता की जांच कर रही है।

जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि कथित नियुक्ति पत्र और वेतन पर्चियां किसने तैयार कीं, फॉर्म 16 कहां से जारी हुए और बैंक में इन दस्तावेजों को किसने प्रस्तुत किया।

इसके अलावा पुलिस लोन की रकम के लेनदेन की भी जांच कर रही है। बैंक की ओर से कर्मचारियों की सूची, लोन अकाउंट विवरण, बैंक स्टेटमेंट और फंड ट्रेल समेत कई दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं।

फर्जीवाड़े के पीछे कौन, जांच से खुलेगा राज

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सभी कथित कर्मचारी वास्तव में संस्थानों में कार्यरत थे या उनके नाम पर केवल कागजी रिकॉर्ड तैयार किया गया था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पूरे मामले में किन लोगों ने आपसी सहयोग से बैंक को कथित तौर पर गुमराह किया।

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दस्तावेजों और बैंक खातों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित 6 करोड़ 40 लाख रुपये की राशि का वास्तविक इस्तेमाल कहां हुआ और इस पूरे मामले में कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं।

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