छत्तीसगढ़ में सामने आया SIM का मामला
दूरसंचार विभाग के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में साइबर अपराध से जुड़ी जांच के दौरान एक प्वाइंट ऑफ सेल (PoS) एजेंट द्वारा नागरिकों के पहचान दस्तावेजों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर 25 मोबाइल कनेक्शन सक्रिय किए जाने का मामला सामने आया। संबंधित लोगों की जानकारी या सहमति के बिना जारी किए गए इन कनेक्शनों की जांच डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) पर की गई।
जिन नंबरों को संदिग्ध पाया गया, उनका दोबारा सत्यापन कराया गया। सत्यापन में विफल रहने वाले कनेक्शन बंद कर दिए गए, जबकि संबंधित PoS एजेंट को भविष्य में नए मोबाइल कनेक्शन जारी करने से रोकते हुए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।
अपने नाम की SIM किसी और को देना पड़ सकता है महंगा
DoT ने साफ तौर पर नागरिकों को सलाह दी है कि उनके नाम पर जारी SIM को किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर, किराए पर या इस्तेमाल के लिए न दें। विभाग के अनुसार, यदि किसी कनेक्शन का गलत इस्तेमाल पाया जाता है तो उस नंबर के मूल ग्राहक तक भी कानूनी जिम्मेदारी पहुंच सकती है।
इसी तरह फर्जी दस्तावेजों के जरिए SIM हासिल करना, धोखाधड़ी या किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करके कनेक्शन लेना भी कानून के दायरे में आता है। ऐसे मामलों में सिर्फ SIM इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि अपराध में मदद या उसे बढ़ावा देने वाले लोग भी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
IMEI नंबर से छेड़छाड़ पर भी सख्ती
दूरसंचार विभाग ने मोबाइल फोन और अन्य दूरसंचार उपकरणों के IMEI नंबर से छेड़छाड़ को लेकर भी चेतावनी दी है। Telecommunications Act, 2023 की धारा 42 में दूरसंचार पहचान से छेड़छाड़ और धोखाधड़ी, छल या प्रतिरूपण के जरिए SIM या दूरसंचार पहचान हासिल करने पर दंड का प्रावधान है।
विभाग ने ऐसे मोबाइल, मॉडेम, मॉड्यूल या SIM Box जैसे उपकरणों के इस्तेमाल से भी बचने को कहा है जिनमें IMEI या अन्य दूरसंचार पहचान को अनधिकृत तरीके से बदला या कॉन्फिगर किया जा सकता है। इन प्रावधानों के उल्लंघन पर तीन साल तक की कैद, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
संचार साथी से जांच सकते हैं अपने नाम पर जारी नंबर
DoT ने नागरिकों से अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की नियमित जांच करने की अपील की है। इसके लिए सरकार के संचार साथी पोर्टल और मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर सूची में ऐसा मोबाइल नंबर दिखाई देता है जिसे आपने जारी नहीं कराया है या जिसका इस्तेमाल आप नहीं करते हैं, तो उसके संबंध में कार्रवाई के लिए अनुरोध किया जा सकता है।
दूरसंचार विभाग पहले से ही संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों की पहचान के लिए तकनीकी प्रणालियों का इस्तेमाल कर रहा है। जुलाई 2026 तक सरकार के अनुसार, दोबारा सत्यापन में विफल रहने वाले 88 लाख से अधिक संदिग्ध मोबाइल कनेक्शन बंद किए जा चुके थे।
ऐसे में मोबाइल ग्राहकों के लिए जरूरी है कि वे समय-समय पर यह जांच करते रहें कि उनकी पहचान पर कोई अनजान मोबाइल नंबर सक्रिय तो नहीं है। अगर ऐसा कनेक्शन सामने आता है, तो उसे तुरंत रिपोर्ट करना और आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध करना महत्वपूर्ण है, ताकि उस नंबर के संभावित गलत इस्तेमाल से जुड़ी परेशानी से बचा जा सके।
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