राजधानी दिल्ली के साकेत थाने में एक महिला पत्रकार द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। पत्रकार का दावा है कि कवरेज के दौरान उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई, अभद्र व्यवहार किया गया और शिकायत दर्ज कराने पहुंचने पर भी उन्हें कई घंटों तक इंतजार करना पड़ा।
पीड़िता के अनुसार, घटना के बाद वह मेडिकल जांच कराने के लिए अस्पताल पहुंचीं और फिर देर शाम अपने सहयोगियों तथा वकीलों के साथ साकेत थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दी। उनका कहना है कि शिकायत स्वीकार करने की प्रक्रिया भी आसान नहीं रही और बार-बार आग्रह करने के बाद शिकायत की रिसीविंग दी गई।
महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों से उन्होंने मदद की उम्मीद की थी, उन्हीं की मौजूदगी में उनके साथ कथित दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि मामले में शामिल कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन देर रात तक कोई ठोस कदम उठता नजर नहीं आया।
थाने के बाहर मौजूद समर्थकों और वकीलों ने भी निष्पक्ष जांच और FIR दर्ज करने की मांग की। उनका कहना था कि केवल शिकायत स्वीकार कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
देर रात तक थाने में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी की चर्चा होती रही, लेकिन प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप था कि कोई अधिकारी सीधे आकर उनसे बात करने को तैयार नहीं था। इसी वजह से थाने के बाहर काफी देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
फिलहाल मामले को लेकर जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने का इंतजार किया जा रहा है। दूसरी ओर, इस घटना ने एक बार फिर पत्रकारों की सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही और शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की सच्चाई जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

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