नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में BRICS Summit की शुरुआत हो चुकी है। सम्मेलन के पहले दिन आतंकवाद, वैश्विक व्यापार, सुरक्षा और भारत-चीन संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दे चर्चा में रहे। साझा बयान में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की गई, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक भी दिन की प्रमुख घटनाओं में रही।
पहलगाम हमले पर BRICS का सख्त संदेश
BRICS देशों के साझा बयान में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की गई। सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने और आतंकवाद की फंडिंग पर रोक लगाने की जरूरत पर जोर दिया।
बैठक में आतंकवाद को किसी धर्म या समुदाय से जोड़ने के बजाय उसके सभी रूपों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई। आतंकियों को पनाह या समर्थन देने वालों की जवाबदेही तय करने और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ सख्त कदम उठाने पर भी जोर दिया गया।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय संधि को जल्द आगे बढ़ाने की जरूरत भी रखी।
मोदी-जिनपिंग की मुलाकात रही अहम
BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई। गलवान घाटी की घटना के बाद भारत और चीन के संबंधों में तनाव देखने को मिला था। ऐसे में दोनों नेताओं की यह मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान चीन की ओर से मिले सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की बात भी कही।
दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध भी इस बातचीत का महत्वपूर्ण पहलू हैं। आने वाले समय में भारत-चीन संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं, इस पर इस बैठक के बाद नजर रहेगी।
पुतिन से भी मिले पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की। भारत की ओर से BRICS के मूल सिद्धांतों को मजबूत करने और सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
सम्मेलन में एकतरफा टैरिफ जैसी व्यापारिक नीतियों पर भी चिंता जताई गई। इसके अलावा परमाणु खतरे और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषय भी चर्चा में रहे।
मोदी ने अगले 20 साल की दिशा पर दिया जोर
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS के लिए अगले 20 वर्षों को ध्यान में रखते हुए नया एजेंडा तैयार करने की जरूरत बताई। उन्होंने वैश्विक दक्षिण के देशों की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने की बात कही।
प्रधानमंत्री ने युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने और समुद्री क्षेत्र में आपातकालीन सहयोग नेटवर्क विकसित करने जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया। उनका संदेश था कि वैश्विक फैसलों में सभी देशों की भागीदारी होनी चाहिए।
पश्चिम एशिया में तेल आपूर्ति पर भी चिंता
BRICS Summit के बीच पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल आपूर्ति से जुड़े घटनाक्रम भी चर्चा में रहे। ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब से जुड़ी तेल पाइपलाइन के प्रभावित होने की खबरों ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई है।
इसके साथ ही बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में हूती विद्रोहियों की गतिविधियों को लेकर समुद्री मार्गों और तेल की आवाजाही पर संभावित असर की चिंता जताई जा रही है। यदि महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर लंबे समय तक बाधा रहती है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।
हालांकि, तेल आपूर्ति से जुड़े अलग-अलग आंकड़ों और दावों की आधिकारिक पुष्टि को लेकर सावधानी जरूरी है।
दूसरे दिन पर रहेंगी नजरें
BRICS Summit के पहले दिन आतंकवाद से लेकर भारत-चीन संबंध और वैश्विक व्यापार तक कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए। अब सम्मेलन के अगले दिन होने वाली बैठकों में सदस्य देशों के बीच किन मुद्दों पर सहमति बनती है और कौन से बड़े फैसले सामने आते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी।
भारत की अध्यक्षता में हो रहा यह सम्मेलन वैश्विक राजनीति और विकासशील देशों की भूमिका के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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