नई दिल्ली: श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए भारत के विकास, बदलती अर्थव्यवस्था, तकनीक, रेलवे और वैश्विक अवसरों पर अपनी बात रखी। उन्होंने युवाओं से कहा कि आज का भारत बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए पहले से कहीं अधिक अवसर उपलब्ध करा रहा है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश में होने वाले नए कामों का विरोध करने वालों पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने ऐसे लोगों को मजाकिया अंदाज में ‘नाराज फूफा’ कहा और बताया कि जब भी कोई नई परियोजना शुरू होती है तो कुछ लोग सबसे पहले यही सवाल करते हैं कि इसकी जरूरत क्या है।
नई परियोजनाओं पर सवाल उठाने वालों पर तंज
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में शामिल प्रतिमा के निर्माण से लेकर तेज गति वाली रेल, डिजिटल भुगतान व्यवस्था और नई संसद जैसी परियोजनाओं तक, कई बड़े फैसलों पर सवाल उठाए गए।
उन्होंने कहा कि विकास से जुड़े हर काम को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि उसकी जरूरत क्यों है। उनके अनुसार, अगर कोई काम देश के भविष्य के लिए जरूरी है तो भारत को उसे आगे बढ़ाने से कोई रोक नहीं सकता।
‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी का भी जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपने हाल के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का जिक्र करते हुए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि उनके बयान के बाद ऐसे लोग सामने आए, जिन पर उन्होंने यह टिप्पणी की थी।
उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को समझाने के लिए होम्योपैथी की दवा का उदाहरण दिया और कहा कि उसके बाद ऐसी विचारधारा रखने वाले लोगों की पहचान और अधिक स्पष्ट हो गई।
रेलवे के विद्युतीकरण को बताया बदलाव का उदाहरण
प्रधानमंत्री ने रेलवे के विद्युतीकरण की रफ्तार का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में पहली विद्युत रेल 1925 में चली थी, लेकिन लंबे समय तक रेलवे विद्युतीकरण की गति धीमी रही।
उन्होंने दावा किया कि 2014 के बाद रेलवे के विद्युतीकरण में काफी तेजी आई और करीब 12 वर्षों में देश ने इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भी पिछले वर्षों में भारतीय रेल के विद्युतीकृत मार्गों में तेजी से वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री ने इसे सरकार के काम करने की बदली हुई गति का उदाहरण बताया।
दुनिया के साथ बढ़ते व्यापारिक अवसर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के साथ दूसरे देशों की व्यापारिक साझेदारी लगातार बढ़ रही है। नए व्यापार समझौतों के कारण भारतीय कारोबारियों और उत्पादों के लिए विदेशों में नए बाजार खुल रहे हैं।
उन्होंने चमड़ा, कपड़ा, फल-सब्जियां और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी बाजारों तक बेहतर पहुंच का सीधा फायदा भारतीय कारोबार और युवाओं को मिल सकता है।
संकटों के बीच भारत की क्षमता का जिक्र
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक आपदाओं, कोरोना महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकटों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में दुनिया को कई बड़े संकटों का सामना करना पड़ा, लेकिन भारत ने इन परिस्थितियों में अपनी क्षमता और मजबूती का प्रदर्शन किया।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत अब केवल चुनौतियों का सामना करने वाला देश नहीं, बल्कि नए अवसरों को तलाशने और उनका लाभ उठाने वाला देश बन रहा है।
युवाओं के सपनों को लेकर प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का भारतीय युवा केवल नौकरी पाने के बारे में नहीं सोच रहा, बल्कि अपना व्यवसाय शुरू करने, नई कंपनियां बनाने और बड़े स्तर पर काम करने का सपना देख रहा है।
उन्होंने कहा कि आज युवा स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, ड्रोन और कृषि में नए प्रयोग करने की इच्छा रखता है। उनके अनुसार, भारत में तैयार हो रहा नया माहौल इन सपनों को पूरा करने के लिए आवश्यक अवसर और सहयोग उपलब्ध करा रहा है।
भारतीय कंपनियों को दुनिया का नेतृत्व करने का आह्वान
प्रधानमंत्री ने युवाओं से सवाल किया कि जब भारतीय नागरिक दुनिया की बड़ी वैश्विक कंपनियों का नेतृत्व कर सकते हैं, तो भारतीयों की बनाई कंपनियां दुनिया का नेतृत्व क्यों नहीं कर सकतीं।
उन्होंने परामर्श, लेखांकन, कानून और वित्त जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से बड़े लक्ष्य तय करने और उन्हें हासिल करने के लिए मेहनत करने का आह्वान किया। उनका संदेश साफ था कि आने वाला समय भारत के युवाओं के लिए बड़े अवसरों का समय है और इन अवसरों को सफलता में बदलने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी की भी है।
निष्कर्ष
एसआरसीसी में प्रधानमंत्री का संबोधन मुख्य रूप से भारत में हो रहे बदलावों, विकास की तेज गति और युवाओं की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं के इर्द-गिर्द रहा। उन्होंने जहां सरकार की उपलब्धियों को सामने रखा, वहीं आलोचकों पर राजनीतिक तंज भी किया। भाषण के अंत में उन्होंने युवाओं को बड़े सपने देखने और भारत की कंपनियों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का संदेश दिया।

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