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हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक साथ, जानें गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

 

हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक साथ, जानें गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

नई दिल्ली: 14 सितंबर 2026, सोमवार को इस बार हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का खास संयोग बन रहा है। एक ही दिन शिव-पार्वती की पूजा के साथ भगवान गणेश की आराधना होगी। गणेश चतुर्थी से गणपति उत्सव की शुरुआत होगी, जबकि हरतालिका तीज पर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर व्रत रखेंगी।

गणेश चतुर्थी पर कब होगी गणपति स्थापना?

पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह शुरू होगी और 15 सितंबर की सुबह तक रहेगी। गणपति स्थापना और पूजा के लिए दोपहर से पहले का समय शुभ माना गया है।

गणपति स्थापना का प्रमुख मुहूर्त सुबह करीब 11:15 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक बताया गया है। अलग-अलग स्थानों और पंचांगों के अनुसार समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। इसलिए श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतिम समय देख सकते हैं।

गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। घर में प्रतिमा स्थापित करने वाले लोग पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई कर चौकी पर साफ कपड़ा बिछा सकते हैं। इसके बाद चावल रखकर गणेशजी की प्रतिमा स्थापित की जाती है।

पूजा में दूर्वा और गणेश मंत्र का महत्व

गणपति पूजा में दूर्वा, फूल, चंदन, कुमकुम, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य का इस्तेमाल किया जाता है। भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य और परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री का उपयोग कर सकते हैं।

पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप किया जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21, 51 या 108 बार मंत्र का जाप कर सकते हैं।

घर में गणपति स्थापना के लिए छोटी, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी की प्रतिमा को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है। स्थापना के बाद भगवान गणेश की आरती और प्रसाद अर्पित किया जाता है।

इसी दिन हरतालिका तीज का व्रत

14 सितंबर को ही हरतालिका तीज भी मनाई जाएगी। इस व्रत में महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित युवतियां मनचाहे वर की कामना से व्रत करती हैं।

इस बार हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन होने के कारण शिव परिवार की पूजा का महत्व और बढ़ गया है। भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार दोनों पर्वों की पूजा कर सकते हैं।

25 सितंबर तक चलेगा गणपति उत्सव

14 सितंबर से शुरू होने वाला गणेश उत्सव अनंत चतुर्दशी तक चलेगा और 25 सितंबर 2026 को गणपति विसर्जन का प्रमुख दिन रहेगा। हालांकि कई परिवार अपनी परंपरा के अनुसार डेढ़, तीन, पांच या सात दिन बाद भी गणपति विसर्जन करते हैं।

गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से बचने की धार्मिक मान्यता भी प्रचलित है। इस संबंध में भी अलग-अलग क्षेत्रों के पंचांगों में समय अलग हो सकता है।

इस तरह 14 सितंबर का दिन हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी और सोमवार के संयोग के कारण धार्मिक रूप से खास रहने वाला है। श्रद्धालु भगवान गणेश के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकते हैं और दोनों पर्वों को अपनी परंपरा के अनुसार मना सकते हैं।

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