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भजन सुनने से लेकर साथ गाने तक, युवाओं में क्यों बढ़ रहा भक्ति संगीत का नया अंदाज?

 

भजन सुनने से लेकर साथ गाने तक, युवाओं में क्यों बढ़ रहा भक्ति संगीत का नया अंदाज?

भजन और भक्ति संगीत की पारंपरिक दुनिया में प्रस्तुति का एक नया रूप सामने आ रहा है। अब धार्मिक गीतों को केवल मंदिरों, सत्संगों या धार्मिक आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय आधुनिक संगीत संयोजन और लाइव परफॉर्मेंस के साथ युवाओं के बीच पेश किया जा रहा है। इसी बदलाव के बीच ‘Bhajan Clubbing’ जैसे कार्यक्रमों ने ध्यान खींचा है।

इन आयोजनों में भजनों की मूल धार्मिक भावना को बनाए रखते हुए उनकी प्रस्तुति में आधुनिक संगीत का इस्तेमाल किया जाता है। लाइव बैंड, अलग-अलग वाद्य यंत्रों और आधुनिक बीट्स के साथ जब लोकप्रिय भजनों की प्रस्तुति होती है, तो दर्शक भी उसमें सामूहिक गायन के जरिए शामिल होते हैं। इससे पारंपरिक भजन कार्यक्रमों की तुलना में माहौल काफी अलग दिखाई देता है।

जन्माष्टमी समारोह में दिखा नया प्रयोग

दिल्ली के द्वारका में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में भी भक्ति संगीत की ऐसी ही आधुनिक प्रस्तुति देखने को मिली। यहां श्रीकृष्ण से जुड़े पारंपरिक भजनों को फ्यूजन म्यूजिक के साथ प्रस्तुत किया गया। भारतीय वाद्य ध्वनियों के साथ आधुनिक संगीत का संयोजन कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा।

इस तरह के आयोजनों में मकसद केवल संगीत को मनोरंजक बनाना नहीं है। आयोजक भक्ति गीतों को ऐसे प्रारूप में लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, जो खासतौर पर युवा श्रोताओं को सहज लगे। इसका एक असर यह भी देखने को मिल रहा है कि जो युवा पारंपरिक सत्संग या सामान्य भजन कार्यक्रमों में कम नजर आते हैं, वे संगीत के इस नए प्रारूप में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

कई शहरों में भक्ति संगीत के साथ नए प्रयोग

भक्ति संगीत को आधुनिक अंदाज में पेश करने का चलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं दिखाई देता। अलग-अलग शहरों में भी पारंपरिक भजनों को लाइव सिंगिंग, बैंड और नए संगीत संयोजन के साथ मंच पर प्रस्तुत करने के प्रयोग किए जा रहे हैं।

डिजिटल म्यूजिक प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया ने भी इस बदलाव को लोगों तक पहुंचाने में भूमिका निभाई है। भजनों के नए संगीत संस्करण ऑनलाइन तेजी से श्रोताओं तक पहुंचते हैं, जिससे धार्मिक संगीत सुनने का तरीका भी बदल रहा है। युवा वर्ग इन गीतों को केवल धार्मिक अवसरों पर सुनने के बजाय अपने नियमित म्यूजिक अनुभव में भी शामिल कर रहा है।

परंपरा बरकरार, प्रस्तुति का तरीका बदला

भक्ति संगीत का मूल आधार आध्यात्मिक जुड़ाव और धार्मिक आस्था है। आधुनिक संगीत के इस्तेमाल से इसका मूल स्वरूप पूरी तरह बदलने के बजाय उसकी प्रस्तुति में बदलाव किया जा रहा है। एक ओर मंदिरों और सत्संगों में पारंपरिक भजन अपनी जगह बनाए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर नए मंचीय प्रयोग भक्ति संगीत को नए दर्शक वर्ग तक ले जा रहे हैं।

‘Bhajan Clubbing’ को अभी भक्ति संगीत की उभरती हुई प्रस्तुति शैली के तौर पर देखा जा रहा है। यह आगे चलकर कितना व्यापक ट्रेंड बनता है, यह कहना जल्दबाजी होगी। हालांकि, युवाओं को भक्ति संगीत से जोड़ने के लिए हो रहे ये प्रयोग धार्मिक आयोजनों और संगीत की बदलती संस्कृति के बीच एक दिलचस्प बदलाव जरूर दिखाते हैं।

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