उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में हरिफाटक मार्ग स्थित श्री संकट मोचन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का मामला चर्चा में है। सड़क चौड़ीकरण की योजना के तहत प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन शुरुआती तकनीकी प्रक्रिया में सामने आई चुनौतियों के बाद फिलहाल काम रोक दिया गया है।
सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर कई तरह के दावे सामने आए हैं। कुछ लोग प्रतिमा के अपनी जगह से नहीं हिलने को धार्मिक चमत्कार बता रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रतिमा को शिफ्ट करने में मुख्य चुनौती उसके जमीन के भीतर मौजूद आधार और संरचना से जुड़ी है। इसलिए इसे केवल धार्मिक घटना के तौर पर देखने के बजाय इसके तकनीकी पक्ष को समझना भी जरूरी है।
सड़क चौड़ीकरण के चलते शिफ्टिंग की थी योजना
उज्जैन में वर्ष 2028 में प्रस्तावित सिंहस्थ महाकुंभ को देखते हुए शहर में कई प्रमुख मार्गों के विस्तार और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की तैयारियां चल रही हैं। इसी क्रम में हरिफाटक मार्ग से जुड़े क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण की योजना बनाई गई थी।
मंदिर की प्राचीन प्रतिमा को नुकसान पहुंचाए बिना पास के स्थान पर स्थानांतरित करने का विकल्प तैयार किया गया था। इसके लिए भारी मशीनों और अन्य तकनीकी साधनों की मदद लेने की कोशिश की गई, लेकिन प्रतिमा की संरचना को देखते हुए प्रक्रिया आसान नहीं रही।
जमीन के भीतर गहराई तक बना है प्रतिमा का आधार
स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर काफी पुराना है और इसकी प्रतिमा का आधार जमीन के भीतर मजबूती से जुड़ा हुआ है। जांच के दौरान जमीन में करीब डेढ़ फीट तक खुदाई किए जाने के बाद विशेषज्ञों को प्रतिमा की संरचना से जुड़ी विशेष स्थिति का पता चला।
बताया गया कि प्रतिमा किसी तरह की लॉकिंग व्यवस्था जैसी संरचना पर स्थापित है। ऐसे में सीधे बल लगाकर उसे उठाने या स्थानांतरित करने से प्रतिमा को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई। विशेषज्ञों ने आगे की प्रक्रिया तय करने से पहले स्कैनिंग तकनीक से प्रतिमा के नीचे और आसपास की संरचना को समझने की जरूरत बताई है।
श्रद्धालुओं ने शिफ्टिंग का किया विरोध
प्रतिमा को स्थानांतरित किए जाने की खबर सामने आने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मंदिर के समर्थन में सामने आए। स्थानीय लोगों और साधु-संतों ने मंदिर के धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व का हवाला देते हुए प्रतिमा को हटाने का विरोध किया।
श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर लंबे समय से स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र रहा है और शुभ कार्यों से पहले भी यहां पूजा-अर्चना की जाती है। इसी वजह से प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने के फैसले को लेकर भावनात्मक माहौल बना हुआ है।
फिलहाल रोक, स्कैनिंग के बाद तय होगी आगे की प्रक्रिया
मामले में अब प्रशासन जल्दबाजी में कोई कदम उठाने के बजाय तकनीकी जांच के आधार पर आगे बढ़ने की तैयारी में है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट और प्रस्तावित स्कैनिंग के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जा सकता है या नहीं।
फिलहाल प्रतिमा की सुरक्षा और श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए शिफ्टिंग की प्रक्रिया रोक दी गई है। प्रशासन, मंदिर समिति और स्थानीय पक्षों के बीच ऐसा समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है, जिससे सड़क विकास की योजना भी प्रभावित न हो और प्राचीन प्रतिमा को किसी तरह का नुकसान भी न पहुंचे।
इस पूरे मामले में सोशल मीडिया पर चल रहे ‘चमत्कार’ के दावों के बीच वास्तविक स्थिति यही है कि प्रतिमा की संरचना और उसके आधार की तकनीकी जांच महत्वपूर्ण है। अंतिम फैसला विशेषज्ञों की जांच और प्रशासनिक स्तर पर होने वाली आगे की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

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