Teacher’s Day 2026: शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, बच्चों के मानसिक विकास, स्क्रीन टाइम, खेलकूद, रचनात्मकता और नशे जैसी चुनौतियों पर अपनी बात रखी। पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में उनकी भूमिका केवल किताबों और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अपने संवाद के दौरान कहा कि आज के बदलते दौर में बच्चों को पढ़ाई के साथ जीवन से जोड़ना भी जरूरी है। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों की रुचियों, व्यवहार और उनके अंदर होने वाले बदलावों पर लगातार नजर रखने की अपील की।
स्क्रीन टाइम को लेकर पीएम मोदी की चिंता
पीएम मोदी ने बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम को एक महत्वपूर्ण चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि मोबाइल और डिजिटल माध्यमों के अत्यधिक इस्तेमाल से बच्चों को बाहर निकालने के लिए उन्हें खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना उपयोगी हो सकता है।
उन्होंने खास तौर पर स्पष्ट किया कि खेलकूद से उनका मतलब वीडियो गेम नहीं, बल्कि मैदान में जाकर वास्तविक खेल खेलने से है। प्रधानमंत्री के अनुसार, बच्चों को शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों में अधिक व्यस्त रखने से उन्हें स्क्रीन की आदत से बाहर आने में मदद मिल सकती है।
बच्चों की क्रिएटिविटी पर दिया जोर
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों की रचनात्मक क्षमता को विकसित करने के लिए स्कूलों में ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिनसे बच्चों की नई चीजें सीखने और कुछ बनाने की आदत विकसित हो।
उनका कहना था कि शिक्षा केवल निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बच्चों को उनकी वास्तविक जिंदगी, आसपास के समाज और व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ड्रग्स को लेकर भी शिक्षकों को किया सावधान
संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने बच्चों और युवाओं में नशीले पदार्थों की समस्या का भी जिक्र किया। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यार्थियों के व्यवहार में होने वाले असामान्य बदलावों को गंभीरता से देखें।
पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षकों को बच्चों के साथ लगातार संपर्क में रहकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नशे जैसी समस्या से निपटने के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि समय रहते जागरूकता और पहचान भी महत्वपूर्ण है।
“बचपन मरने नहीं देना चाहिए”
प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन में बच्चों के बचपन को सुरक्षित रखने की बात खास तौर पर सामने आई। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बच्चों के भीतर के बचपन को जीवित रखने में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए।
उनके अनुसार, बच्चों पर पढ़ाई का दबाव इतना नहीं होना चाहिए कि उनकी स्वाभाविक जिज्ञासा, खेल और रचनात्मकता प्रभावित हो जाए। शिक्षक बच्चों को पढ़ाई के साथ जीवन के अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर दे सकते हैं।
शिक्षक की भूमिका सिर्फ पढ़ाने तक सीमित नहीं
पीएम मोदी ने अपने संदेश में शिक्षा जगत से व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षक का काम सिर्फ किताब का पाठ पढ़ाना नहीं है, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व और भविष्य के निर्माण में भी योगदान देना है।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों को बधाई देते हुए उनके योगदान की सराहना की और उम्मीद जताई कि शिक्षक नई पीढ़ी को बेहतर दिशा देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
निष्कर्ष
शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश शिक्षा के बदलते स्वरूप और बच्चों के समग्र विकास पर केंद्रित रहा। स्क्रीन टाइम, खेलकूद, रचनात्मकता और नशे जैसी चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने शिक्षकों से बच्चों की जिंदगी के साथ और करीब से जुड़ने की अपील की। उनका संदेश साफ था कि अच्छी शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि बच्चों को जिंदगी समझने और उनका बचपन बनाए रखने में भी शिक्षक की अहम भूमिका होती है।

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