नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े विरोध प्रदर्शन का केंद्र बन सकता है। रिटायर्ड अर्धसैनिक बलों (CAPF) के अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिवारों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन और सांकेतिक भूख हड़ताल का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि यदि सरकार ने निर्धारित समय तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो वे 12 से 18 नवंबर तक जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे।
रिटायर्ड जवानों और अधिकारियों के संगठन ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के अनुसार, उनकी प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, अर्धसैनिक बलों के लिए अलग ट्रिब्यूनल का गठन, वेतन आयोग से जुड़े मुद्दों का समाधान तथा CAPF से संबंधित नए कानून की समीक्षा शामिल है।
संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्षों से विभिन्न मंचों के माध्यम से सरकार और संबंधित मंत्रालयों के समक्ष अपनी समस्याएं रखी जाती रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। इसी वजह से आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला लिया गया है।
नया CAPF कानून बना विवाद का कारण
प्रदर्शन के पीछे सबसे बड़ा मुद्दा हाल ही में लागू किए गए CAPF कानून को माना जा रहा है। आंदोलनकारी पक्ष का आरोप है कि इस कानून के बाद भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को और अधिक कानूनी मजबूती मिली है, जिससे CAPF के अपने अधिकारियों के प्रमोशन और नेतृत्व के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
उनका कहना है कि कई अधिकारी 25 से 30 वर्षों तक सेवा देने के बावजूद शीर्ष पदों तक नहीं पहुंच पाते, जबकि प्रतिनियुक्ति पर आने वाले अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल जाती हैं। इसी मुद्दे को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है।
पुरानी पेंशन बहाली की मांग तेज
संगठन का कहना है कि वर्ष 2004 के बाद भर्ती हुए जवानों को नई पेंशन योजना (NPS) के दायरे में रखा गया है, जबकि वे पुरानी पेंशन योजना की बहाली चाहते हैं। उनका तर्क है कि देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जवानों को सेवा समाप्ति के बाद बेहतर सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।
परिवार भी होंगे आंदोलन का हिस्सा
एसोसिएशन ने दावा किया है कि प्रस्तावित आंदोलन में केवल रिटायर्ड कर्मचारी ही नहीं, बल्कि उनके परिवार भी शामिल होंगे। संगठन के अनुसार, यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। साथ ही सरकार से बातचीत के लिए भी दरवाजे खुले रहेंगे।
सरकार के जवाब का इंतजार
फिलहाल सरकार की ओर से इस प्रस्तावित आंदोलन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, आंदोलन की घोषणा के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच बातचीत होती है या मामला बड़े प्रदर्शन का रूप लेता है।

0 टिप्पणियाँ