पटना, 5 सितंबर 2026: बिहार में बाढ़ का संकट अब और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। राजधानी पटना में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से नदी के आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। शनिवार सुबह गांधी घाट पर गंगा ने उच्चतम बाढ़ स्तर को भी पार कर लिया। महज चार घंटे में जलस्तर करीब 10 सेंटीमीटर बढ़ने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी और राहत कार्य तेज कर दिए हैं।
पटना पर बढ़ता बाढ़ का दबाव
गंगा के साथ सोन और पुनपुन नदियों का बढ़ा हुआ जलस्तर भी पटना के लिए चुनौती बना हुआ है। नदी किनारे के कई निचले हिस्सों में पानी पहुंचने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।
पटना प्रशासन ने नदी के पानी को शहर के भीतर आने से रोकने के लिए जलनिकासी व्यवस्था से जुड़े कई कदम उठाए हैं। संवेदनशील घाटों पर लोगों की आवाजाही सीमित की गई है और कुछ घाटों को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
सिर्फ पटना नहीं, कई जिलों में हालात चिंताजनक
बिहार में बाढ़ का असर राजधानी तक सीमित नहीं है। गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
सरकारी जलस्तर आंकड़ों में पटना के दीघाघाट, कोल्हाचक और पुनपुन के श्रीपालपुर समेत कई निगरानी केंद्रों पर नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है। कोल्हाचक में गंगा का स्तर उच्चतम बाढ़ स्तर से भी ऊपर दर्ज हुआ है।
लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित
बाढ़ का असर राज्य के कई हिस्सों में दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक राज्य में 5 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। निचले इलाकों में घरों और सड़कों तक पानी पहुंचने से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ रहा है।
दियारा क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के सामने सबसे बड़ी परेशानी घर, पशुधन और जरूरी सामान को सुरक्षित जगह पहुंचाने की है। कई स्थानों पर नावों के जरिए लोगों और सामान को निकालने का काम चल रहा है।
सरकार ने बढ़ाई रेस्क्यू टीमों की तैनाती
स्थिति को देखते हुए बिहार सरकार ने राहत और बचाव अभियान को तेज किया है। NDRF और SDRF की कुल 33 टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में लगाई गई हैं। इसके अलावा लगभग 693 सरकारी नावें राहत और लोगों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं।
प्रभावित इलाकों में राहत शिविर और सामुदायिक रसोई की व्यवस्था की जा रही है। लोगों तक भोजन, पीने का पानी और जरूरी सामान पहुंचाने पर प्रशासन का जोर है।
मुख्यमंत्री ने किया हवाई सर्वेक्षण
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद अधिकारियों के साथ बैठक कर राहत एवं बचाव अभियान तेज करने और तटबंधों की लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।
पटना में बाढ़ से सुरक्षा के लिए बनाए गए टाउन प्रोटेक्शन सिस्टम के सभी 108 खुले हिस्सों को बंद करने का आदेश भी दिया गया है, ताकि नदी का पानी शहर की ओर आने का खतरा कम किया जा सके।
आने वाले घंटों में क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता गंगा और दूसरी प्रमुख नदियों के जलस्तर को लेकर बनी हुई है। ऊपर के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश और बैराजों से पानी छोड़े जाने का असर बिहार की नदियों पर पड़ रहा है।
प्रशासन लगातार जलस्तर, तटबंध और निचले इलाकों की निगरानी कर रहा है। लोगों से अपील की गई है कि वे बाढ़ के पानी में जाने से बचें और प्रशासन द्वारा बनाए गए राहत शिविरों या सुरक्षित स्थानों का इस्तेमाल करें।
कुल मिलाकर, 5 सितंबर 2026 को बिहार में बाढ़ की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। पटना में गंगा का उच्चतम बाढ़ स्तर पार करना इस संकट की गंभीरता को और बढ़ाता है। आने वाले घंटों में नदी के जलस्तर में होने वाला बदलाव बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।

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