दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ी महिला प्रदर्शनकारियों की असली तस्वीरों और वीडियो को AI की मदद से बदलकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक रूप में शेयर करने का मामला सामने आया है। कुछ तस्वीरें पूरी तरह AI से बनाई गई थीं, जबकि कई वास्तविक फोटो और वीडियो में डिजिटल बदलाव करके महिलाओं को अलग कपड़ों और रूप में दिखाया गया। यह सामग्री Instagram और Facebook पर प्रसारित हुई, जिसके बाद कई लोगों ने इसे वास्तविक मानकर महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं।
मामले की जांच में सामने आया कि AI का इस्तेमाल केवल नई तस्वीरें बनाने के लिए नहीं किया गया। प्रदर्शन के दौरान खींची गई वास्तविक तस्वीरों और बनाए गए वीडियो को आधार बनाकर उनमें कई तरह के बदलाव किए गए। कहीं कपड़े बदले गए, तो कहीं चेहरे, शरीर और पोज में परिवर्तन किया गया। कुछ मामलों में फेस स्वैप और बॉडी स्वैप जैसी तकनीकों का भी इस्तेमाल किया गया।
असली तस्वीरों को दिया गया अलग रूप
पड़ताल के दौरान कई ऐसे विजुअल सामने आए जिनमें प्रदर्शन में मौजूद महिलाओं को अलग-अलग कपड़ों में दिखाया गया था। जब इन तस्वीरों की तुलना मूल फोटो और वीडियो से की गई तो दोनों में स्पष्ट अंतर नजर आया।
एक महिला की तस्वीर को प्रदर्शन के दूसरे दृश्य के साथ जोड़कर प्रसारित किया गया। इसी तरह पोस्टर लेकर खड़ी एक महिला की तस्वीर में उसके कपड़ों और पोस्टर तक में बदलाव दिखाई दिया। कुछ वीडियो में पानी बांटती और सफाई करती महिलाओं के पहनावे को भी AI की मदद से बदल दिया गया था।
वीडियो में भी की गई छेड़छाड़
AI से छेड़छाड़ सिर्फ तस्वीरों तक सीमित नहीं रही। प्रदर्शन के दौरान रिकॉर्ड किए गए कुछ वीडियो को भी बदलकर सोशल मीडिया पर शेयर किया गया। एक वीडियो में पत्रकार से बातचीत कर रही महिला के पहनावे में बदलाव किया गया, जबकि मूल वीडियो में वह अलग कपड़ों में दिखाई देती थी।
इसी तरह प्रदर्शन के दौरान नारे लगाती एक महिला का वीडियो बदले हुए रूप में सामने आया। एक अन्य मामले में इंदौर की कंटेंट क्रिएटर हिमानी चावला से जुड़े वीडियो के कपड़ों में AI की मदद से बदलाव किया गया और उसे जंतर-मंतर प्रदर्शन से जोड़कर प्रसारित किया गया।
महिलाओं को ऑनलाइन निशाना बनाया गया
बदले हुए फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचने के बाद कुछ यूजर्स ने इन्हें असली मान लिया। इसके बाद महिलाओं के पहनावे और चरित्र को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं की तस्वीरों और वीडियो का इस तरह इस्तेमाल उनके खिलाफ ऑनलाइन उत्पीड़न का माध्यम बन गया।
इस दौरान कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स पर महिलाओं की निजी जानकारी सार्वजनिक करने और उन्हें धमकाने जैसी गतिविधियों के आरोप भी सामने आए। AI से बदली गई सामग्री ने इस तरह के ऑनलाइन उत्पीड़न को और बढ़ावा दिया।
Meta ने हटाए अकाउंट्स और कंटेंट
मामले से जुड़े ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी Meta को दी गई, जहां इस तरह की सामग्री साझा की गई थी। 2 सितंबर को Meta ने पुष्टि की कि समीक्षा के बाद उसकी नीतियों का उल्लंघन करने वाले संबंधित अकाउंट्स और कंटेंट को हटा दिया गया है।
यह मामला बताता है कि AI तकनीक का गलत इस्तेमाल किस तरह किसी व्यक्ति की वास्तविक तस्वीर या वीडियो को बदलकर उसकी छवि खराब करने के लिए किया जा सकता है। खासतौर पर महिलाओं की तस्वीरों के साथ इस तरह की छेड़छाड़ उनकी निजता और सम्मान के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी तस्वीर या वीडियो को बिना पुष्टि के वास्तविक मानना उचित नहीं है।

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