बाढ़ के दौरान पानी का बहाव इतना तेज था कि कई दुकानों में रखा सामान सुरक्षित नहीं बचाया जा सका। पानी उतरने के बाद प्रभावित इलाकों में बिखरा सामान, क्षतिग्रस्त दुकानें और घरों में हुई तबाही लोगों की मुश्किलों को बयां कर रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक इस बार मंदाकिनी नदी का जलस्तर बेहद खतरनाक स्थिति तक पहुंच गया था। एक दुकानदार ने बताया कि इस बार की बाढ़ वर्ष 2003 में आई बाढ़ से भी करीब चार फीट अधिक ऊंची थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय रामघाट क्षेत्र में हालात कितने गंभीर रहे होंगे।
दुकानों और घरों में घुसा पानी
बाढ़ का पानी रामघाट की सड़क और आसपास के रिहायशी इलाके में फैल गया था। कई घरों और दुकानों के अंदर पानी भरने से लोगों को अपना सामान बचाने का मौका तक नहीं मिला। कुछ लोगों ने जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, जबकि काफी सामान पानी के साथ बह गया।
किराना सहित कई दुकानों को नुकसान पहुंचा है। दुकानदारों का कहना है कि उनकी रोजी-रोटी का बड़ा हिस्सा इन्हीं दुकानों पर निर्भर है और बाढ़ ने उनके कारोबार को गंभीर झटका दिया है।
सामान के साथ जरूरी दस्तावेज भी हुए नष्ट
बाढ़ से सिर्फ घरेलू और व्यापारिक सामान ही नहीं, बल्कि लोगों के महत्वपूर्ण दस्तावेज भी प्रभावित हुए हैं। एक दुकानदार ने बताया कि उसके शैक्षणिक रिकॉर्ड और M.Sc. तक के जरूरी कागजात बाढ़ के पानी में बह गए। उसके मुताबिक करीब एक लाख रुपये की कीमत का लैपटॉप भी पानी में नष्ट हो गया।
ऐसे लोगों के सामने अब आर्थिक नुकसान के साथ अपने जरूरी दस्तावेज दोबारा हासिल करने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
राहत और मुआवजे की उम्मीद
बाढ़ प्रभावित परिवार और दुकानदार अब प्रशासन से मदद की उम्मीद कर रहे हैं। प्रभावित लोगों का कहना है कि नुकसान काफी ज्यादा है और उन्हें राहत सामग्री के साथ उचित मुआवजे की जरूरत है।
फिलहाल पानी कम होने के बाद लोग अपने घरों और दुकानों को व्यवस्थित करने में जुटे हैं। लेकिन भारी नुकसान के कारण सामान्य जिंदगी पटरी पर लौटने में समय लग सकता है।
चित्रकूट में मंदाकिनी की इस बाढ़ ने एक बार फिर दिखा दिया है कि प्राकृतिक आपदा आने पर लोगों की मेहनत और वर्षों से जुटाया गया सामान कुछ ही घंटों में बर्बाद हो सकता है। अब प्रभावित लोगों की नजर प्रशासन की राहत और सहायता पर है।

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